Posts

Diwali

पटाखो कि दुकान से दूर हाथों मे, कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा... एक गरीब बच्चे कि आखों मे, मैने दिवाली को मरते देखा. थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की... पर उन्ही पूराने कपडो को मैने उसे साफ करते देखा. तुमने देखा कभी चाँद पर बैठा पानी? मैने उसके रुखसर पर बैठा देखा. हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश... उसे चूप-चाप ग़मो को पीते देखा. थे नही माँ-बाप उसके.. उसे माँ का प्यार आैर पापा के हाथों की कमी मेहंसूस करते देखा. जब मैने कहा, "बच्चे, क्या चहिये तुम्हे"? तो उसे चुप-चाप मुस्कुरा कर "ना" मे सिर हिलाते देखा. थी वह उम्र बहुत छोटी अभी... पर उसके अंदर मैने ज़मीर को पलते देखा रात को सारे शहर कि दीपो कि लौ मे... मैने उसके हसते, मगर बेबस चेहरें को देखा. हम तो जीन्दा है अभी शान से यहा. पर उसे जीते जी शान से मरते देकखा. नामकूल रही दिवाली मेरी... जब मैने जि़दगी के इस दूसरे अजीब से पहेलु को देखा. कोई मनाता है जश्न आैर कोई रेहता है तरस्ता... मैने वो देखा.. जो हम सब ने देख कर भी नही देखा. लोग कहते है, त्योहार होते है जि़दगी मे खूशीयो के लिए, तो क्यो मै...

बुढ़ापा

                                                                                              बुढ़ापा एक कमरा ही तो था ,वो भी बेटे बहुँवो के लिए छोड़ दी आज कल आँगन में ही मेरी खाट लगती है  कल रात काफी सर्दी थी आखों की पुतलियाँ चिपक गयी थी सुबह , कुछ साफ़ दिखाई नहीं देता,नज़र कमजोर हो गयी है पर अपने लोगों के मिजाज़ की कडवाहट साफ़ दिखाई देती है कभी चलना सिखाता था बच्चों को उनकी ऊँगली पकड़ कर वो बच्चे आज लकड़ी का डंडा देकर चले गएँ है कहीं और उनके बच्चे वो डंडे को छिपा कर मुझसे खेला करते है उम्र गुजर गयी इज्जत -शोहरत कमाने में , कई लोग आया करते थे हाल पूछने जवानी में जब से ये कम्बखत बुढ़ापा आया ,तब से कोई आता नहीं शायद बुढ़ापा छूवाछूत की बीमारी हो एक पुरानी खाट है जो अक्सर सुबह होते ही बहुएं हटा देती है घर जो साफ़ करना होता है वो भी मेरी तरह ...

वो साल

                                                                  वो साल वो साल जो चला गया,कुछ इस तरह से जला गया क्या कहूं दामिनी तेरी याद ने हमें रुला गया नए साल के नए महॊल में महोत्स्ब मना रहे लोग मै क्यों उदास हूँ ,न जाने मेरा क्या चला गया... सजा मेलेगी,सज़ा मिलेगी,सज़ा मिल भी जाये तू क्या किसी को दामिनी मिलेगी पहली तारीख जनवरी की,खुस तॊ ऐसे है लोग जैसे ये पहली तारीख जनवरी  की सारी ज़िन्दगी न मिलेगी... अच्हा  हुआ  खुदा तूने उसे जन्नत बुला लिया ये जमीं शायद उसके लायक न रही होगी रोशिनी ही थी कुछ इस तरह के तेरे फलक पैर कर भी कुछ अलग लगेगी... सुबह हरे घास की बूंदों को देख कर सोचा रात आपने हे ठण्ड में तडप रही होगी चख कर देखा तॊ यकीं आया के उसकी आखिरी चीख खुदा के दरवाजे पैर दस्तक दी होगी.... हम सभी कई बहाने से जसं मना लिए दिन ख़त्म होते हे ख्याल आया उसके चाहने वालों की शाम कैसी रही होगी....

mai wo saks

aye meri kwahishen aaj to angdai mat le tere ubharne se meri jaan nikal jaati hai mai wo hara hua sitamgar hun jiski rooh se uski jaan nikalti jaati hai ! aye meri pyaas aaj bujhne ki baat mat kar teri pyaas bujhane ki tammana me mere ask nikalti jaati hai mai wo adhoora suks hun jiske paas sab kuch hote hue bhi aapahijta sii lag jaati haii ! aye meri umeed aaj to mat toot tere tootne se zindagi nakam lag jati hai mai wo khoya hua insaan hun jiske ghar ka rasta door hoti chali jati hai ! aye meri dhadkane aaj to tu mat dhadak tere dhadakne se use khoone ka khayal aa jata hai mai wo saks hun jiski dhadkane  uske alawa or  bhi koi sunta hai ! aye meri bikhrti aarzoo aaj too tu mat bikhar tere bikharne se daman choot ta nazar aata hai mai wo suks hun jiski aarmano ka samandar kabhi kinare tak nahin jata hai ! aye meri dillagi aaj to mere jajbat se mat khel mera dil tere rang ko pehchan nahin pata hai mai wo saks hun jiske dil ne aise kho...

Akelapan

Khule  Dil se Khuli ye  Baat , Kash kuch aur din reh leta tere sath  ! Ab kabhi mil payenge  ye  ho gayi, bas  ek  baat, Kabhi  hum the  sath sath, hoti thi  mulakaat ! Ab na wo safar raha, na wo  hum safar, Hal  aisa jaise hum ho gaye ho tar tar ! Teri  kami muje  kuch iss  tarah se khali  hai, Na  jane kaise hogi  ye Zindagi ki  nayya  par ! Haalate  dil aissi hai jaise  ho  ye  banzar   bhumi  ya  registaan  thar .......                                Date :  09-Dec-2012,                                    Cool Winter,  Bangalore